हम बीमार क्यों पड़ते हैं ? जब हम बीमार होते हैं या कोई भयंकर बीमारी होती है तो उस खुदा को कोसने लगते हैं ! जैसे कि उस खुदा ने हमारे साथ ऐसा किया है!मगर हम यह नहीं समझ पाते कि जो हमारे साथ हो रहा है ,जो हमारे साथ होगा, जो हमारे साथ हुआ था ! इसके जिम्मेदार हम स्वयं ही हैं क्योंकि हर समस्या के कारण और निवारण हम खुद ही हैं ! क्योंकि हम जानते हैं हम जितना भी पैसा कमा ले , हम उस पैसे को खा नहीं सकते ! हमें खाने के लिए दो रोटी ही चाहिए , जब हम बीमार पड़ते हैं या कोई भयंकर बीमारी होती है ! तो हम सोचने लगते कि हमारे साथ एसा क्यों हुआ , मगर हम यह नहीं सोचते की हमने ऐसा कर्म दूसरों के साथ क्यों किया जिस के करण हमारे साथ ऐसा हो रहा है! जीवन का चक्कर बड़ा ही अनोखा हैं ! अगर हमने किसी को दुख दिया है तो,हम दुखी हो कर के ही मरेगे ! क्योंकि हमारे कर्मों का हिसाब -किताब यह ही चिकतू होता हैं ! यह न्यूटन के तीसरे सिद्धांत की तरह है!जैसा हम करते हैं वैसा हम पते हैं...
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